कुछ पल, कुछ यादें
कुछ लम्हे , कुछ नग़में
एक खालीपन की चादर
ओढ़ ली है मैंने।
गम तो होता है
किसी जगह को
छोड़ कर जाने का
संसार तो थोड़े समय के लिये ही सही
बिखर तो जाता ही है।
लेकिन परेशान होने से क्या
आशा की नई कोपलों को
फ़िर से जन्म तो लेना ही होगा
गतिमय संसार में निरंतरता ही
एक मात्र सत्य है।
हमेशा ही कुछ पीछे छूटेगा
तो क्या मनुष्य निरंतर
यादों का स्वेटर ही बुनता रहेगा।
एक नई जगह एक नया सवेरा
हो रहा है दामोदर के तट पर।